कोटद्वार। राजकीय महाविद्यालय कण्वघाटी में सोमवार को हिंदी दिवस हर्षोल्लास एवं गरिमा के साथ मनाया गया। इस दौरान आयोजित विचार गोष्ठी, कविता वाचन और भाषण प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने अपने विचार रखे।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य प्रो. डा. हरीश चंद्र ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर ‘विकसित भारत में हिंदी की भूमिका और नई शिक्षा नीति’ विषय पर विचार गोष्ठी तथा निबंध लेखन और कविता पाठ प्रतियोगिता भी आयोजित कराई गयी। प्राचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय एकता की पहचान है। हिंदी को रोजगार और तकनीक से जोड़कर इसे वैश्विक स्तर पर सशक्त बनाया जा सकता है।
हिंदी विभाग की प्रभारी डा. दीप्ति ने बताया कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। इसी उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष हिंदी दिवस मनाया जाता है। इस दौरान आयोजित प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। वहीं, दिव्यांशु, कु. निकिता, कु. तनुजा, कु. मेघा, कु. तनु और कु. याग्निका ने कविता पाठ एवं हिंदी के महत्व पर अपने विचार रखे। कु. तनु और दिव्यांशु ने स्वरचित कविताओं का पाठ किया।
कार्यक्रम के अंत में विभिन्न प्रतियोगिताओं में क्रमशः प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत कर समस्त विद्यार्थियों को हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग की शपथ भी दिलाई गई। इस दौरान महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक व कर्मचारी आदि मौजूद रहे।
