दिल्ली -एनसीआर के 52 केंद्रों में गढ़वाली – कुमाऊंनी लोक भाषाओं की कक्षाएं संचालित : बछेती
पौड़ी। दिल्ली भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद बछेती ने लोक भाषा संरक्षण को आज के दौर की सबसे बड़ी जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि यदि गढ़वाली -कुमाऊनी भाषाओं के प्रति नई पीढ़ी में जागरूकता पैदा नहीं की गई तो आने वाले एक दो दशक में हमारी यह दोनों लोक भाषाएं मृत प्राय: हो जाएगी।
दिल्ली में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद पहली बार अपने पैतृक गांव पहुंचे विनोद बछेती ने पौड़ी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि हमें तमाम व्यस्ताओं व अन्य करणों के बावजूद भी अपनी मातृभूमि के प्रति दायित्वों का निर्वहन करने से पीछे नहीं हटना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह खुद हर दो माह में राजनीतिक व अन्य व्यवस्थाओं के बावजूद अपने पैतृक गांव जाकर स्थानीय लोगों से संवाद कर कुशलक्षेम पूछते हैं।
उन्होंने लोक भाषाओं के विलुप्त होने की आशंका के प्रति अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में नई पीढ़ी के गढ़वाली कुमाऊंनी बच्चों के लिए लोग भाषा सीखने हेतु करीब 52 स्थानों पर कक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि हमें लोक भाषा के संरक्षण में अपने प्रयास सुनिश्चित करने होंगे क्योंकि हमारी पहचान ही अपनी लोग गढ़वाली कुमाऊंनी लोक भाषाओं से है।
