कोटद्वार। राजकीय महाविद्यालय कण्वघाटी में गढ़वाली भाषा दिवस के अवसर पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह विचार गोष्ठी हिंदी विभाग के तत्वाधान में आयोजित की गयी।
महाविद्यालय परिसर में आयोजित गोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता डा. एमएन नौडियाल (असिस्टेंट प्रोफेसर संस्कृत) ने अपनी कविता ‘ढोल’ के माध्यम से पलायन की पीड़ा को उजागर किया। गोष्ठी में डा. दीप्ति मैठाणी (विभागाध्यक्ष हिंदी) ने कहा कि गढ़वाली भाषा हमारे लोक साहित्य और लोक संस्कृति की आत्मा है। हमें अपनी गढ़वाली भाषा को केवल दिवस तक सीमित न रखकर दैनिक जीवन में अपनाना होगा।
महाविद्यालय के प्राचार्य हरीश चन्द्र जी ने अपने संबोधन में कहा कि गढ़वाली बोली केवल बोली ही नहीं, बल्कि हमारी पहचान भी है। उन्होंने सभी युवाओं को अपनी गढ़वाली मातृभाषा से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि मातृभाषा का सम्मान किए बिना कोई भी सभ्यता आगे नहीं बढ़ सकती है। गोष्ठी में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगण, शिक्षकेत्तर कर्मचारीगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
