👉 आजादी के बाद जम्मू के लिए बिजनौर व गढ़वाल के लिए एक ट्रेन
👉 विकास पुरूषों को आम जन से नहीं कोई सरोकार
(वरिष्ठ पत्रकार मुकेश सिन्हा)
नजीबाबाद। उत्तर प्रदेश के जनपद बिजनौर व उत्तराखंड के जनपद पौड़ी गढ़वाल का दुर्भाग्य ही कहा जा सकता है कि देश की आजादी के बाद आज तक वैष्णो देवी यात्रा के लिए नजीबाबाद से केवल एक ट्रेन ही उपलब्ध है। बिजनौर जनपद के प्रमुख रेलवे स्टेशन नजीबाबाद से होकर एक दर्जन ट्रेन जम्मू तक आती जाती है। यह इन जनपदों का दुर्भाग्य है कि खुद को विकास पुरुष व समाजसेवी की उपाधि से नवाजने वाले माननीय एक भी ट्रेन का ठहराव नजीबाबाद रेलवे स्टेशन पर नहीं करा सके। आखिर आम जनता के हित में इस सुविधा को संसद सहित अन्य सदन में उठाने की जिम्मेदारी किसकी है? जनता द्वारा चुने गये माननीय तो अपनी यात्रा सरकारी धन से सुविधाजनक तरीके से कर लेते हैं। लेकिन आम जनता की परेशानी से मुंह मोड़ लेना आम बात है।
नजीबाबाद में रेलवे स्टेशन का निर्माण ब्रिटिश सरकार ने वर्ष 1885 में किया था। पर्वतीय क्षेत्र लैंसडाउन की खूबसूरत वादियों में गढ़वाल राइफल्स का का मुख्यालय बनाने, आवागमन व माला ढुलाई के लिए कोटद्वार को भी वर्ष 1902 में रेलवे मार्ग से जोड़ा गया। देश की आजादी के बाद रेल सेवा का विस्तार तो जरूर हुआ है। लेकिन वर्तमान जरूरत के हिसाब से आमजन के हित के लिए रेल सेवा ऊंट के मुंह में जीरा समान है। सबसे ज्यादा समस्या रेल गाड़ियों के ठहराव ना होने की है। निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, विकास पुरूषों द्वारा आमजन की मूलभूत सुविधाओं से मुंह मोड़ने से आमजन आहत हैं।
यदि उत्तराखंड राज्य की सीमा से सटे बिजनौर जनपद के प्रमुख रेलवे जंक्शन नजीबाबाद में एक नजर घुमाएं तो वहां से एक दर्जन ट्रेनें बंगाल, बिहार से जम्मू के लिए बिना रुके गुजरती हैं। देश की आजादी से आज तक नजीबाबाद जंक्शन में केवल एक रेलगाड़ी सियालदाह – जम्मू तवी एक्सप्रेस ट्रेन संख्या 13151 -13152 का ही ठहराव है। जिसमें भी पर्याप्त सीट नहीं मिली पाती हैं। जबकि एक दर्जन ऐसी दैनिक, साप्ताहिक व सप्ताह में दो या तीन दिन चलने वाली रेलगाड़ी हैं। जो नजीबाबाद रेलवे स्टेशन पर बिना रूके निकल जाती है। इन ट्रेनों का ठहराव मुरादाबाद -सहारनपुर लगभग 200 किमी से अधिक के बीच नहीं हैं। जबकि नजीबाबाद दोनों प्रमुख रेलवे स्टेशन के बीच है। यह स्टेशन जनपद बिजनौर व उत्तराखंड के जनपद पौड़ी गढ़वाल के यात्रियों लिए बहुत महत्वपूर्ण है। बिजनौर व पौड़ी गढ़वाल के यात्रियों को वैष्णो देवी जाने के लिए हरिद्वार या मुरादाबाद जाकर रेलगाड़ी की सुविधा का लाभ लेना पड़ता है। यही नहीं, इन क्षेत्रों के सेना के जवानों को भी पठानकोट, अंबाला, जम्मू -कश्मीर, बंगाल, आसाम, बिहार जाने के लिए मुरादाबाद, सहारनपुर, हरिद्वार व दिल्ली जाकर रेलगाड़ी पकड़नी पड़ती है। लेकिन देश की संसद व राज्य सभा में बैठे सासंद या विधान परिषद, विधानसभा में बैठे विधायकों को आमजन की इस समस्या से कोई सरोकार नहीं है।
बिहार, बंगाल व आसाम से जम्मू की ट्रेन नजीबाबाद में नहीं रूकती
बिहार, बंगाल, आसाम से जम्मू के बीच चलने वाली एक दर्जन ट्रेन मुरादाबाद -सहारनपुर के बीच प्रमुख रेलवे स्टेशन नजीबाबाद पर नहीं रूकती है। 12237 -12238 बेगमपुरा एक्सप्रेस (वाराणसी -जम्मू), 15651 -15652 लोहित एक्सप्रेस ( गोहाटी -जम्मू), 12231 -12232 हिमगिरी एक्सप्रेस (हावडा -जम्मू ), 12356 -12357 अर्चना एक्सप्रेस पटना -जम्मू , 12491 -12492 मोरध्वज एक्सप्रेस बरौनी बिहार से जम्मू सहित एक दर्जन ट्रेन है जो नजीबाबाद स्टेशन पर नहीं रुकती है यदि इन ट्रेनों का नजीबाबाद ठहराव हो जाएं तो बिजनौर व पौड़ी गढ़वाल की जनता को बेहतर रेल सुविधा मिलेगी और रेल की आय व पर्यटन को बढ़ावा मिल सकेगा।
कोटद्वार से जम्मू के लिए ट्रेन चलाने की उठी मांग
नजीबाबाद के पत्रकार व आरटीआई कार्यकर्ता मनोज शर्मा ने सामाजिक दायित्व निभाते हुए केन्द्रीय रेल मंत्री को पत्र लिखकर उत्तराखंड राज्य के कोटद्वार से जम्मू कटरा तक एक ट्रेन चलाने की मांग की है। मनोज शर्मा ने पत्र में कहा है पौड़ी गढ़वाल व बिजनौर की जनता, व्यापारी व सेना के जवानों जम्मू आने जाने की सुविधा होगी तो प्रतियोगी परीक्षा में आने जाने के लिए विद्यार्थियों को भी लाभ मिलेगा। नजीबाबाद से जम्मू के लिए केवल एक ट्रेन स्यालदाह एक्सप्रेस ट्रेन है जिसमें पर्याप्त सीट नहीं मिलती है। बिजनौर व पौड़ी गढ़वाल जनपद धार्मिक, ऐतिहासिक व पर्यटन महत्व के स्थलों को समेटे हुए है। यदि ट्रेनों का विस्तार हो तो पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
उत्तराखंड सरकार ने पूर्व में भी रेल मंत्रालय को लिखा था पत्र
कोटद्वार से जम्मू, दिल्ली व जयपुर, देहरादून के लिए सीधी ट्रेन चलाने की मांग दशकों से की जाती रही है। लेकिन माननीय विकास पुरूषों की चुप्पी से ट्रेन का संचालन नहीं हो पा रहा है। उत्तराखंड सरकार के अपर सचिव नरेन्द्र जोशी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के संदर्भ का हवाला देकर जनता की मांग को रेल मंत्रालय के अनुसचिव को कोटद्वार से सुबह दिल्ली, जम्मू, देहरादून व जयपुर के लिए ट्रेन चलाने पर विचार करने को पत्र लिखा है। लेकिन रेल मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया है।
कोटद्वार से देहरादून, रामनगर तक चलाई जा सकती है ट्रेन
देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश व हल्द्वानी रामनगर रेलवे स्टेशन के बीच पौड़ी गढ़वाल अलग थलग पड़ा हुआ जनपद है। जहां रेलवे की कनेक्टिविटी ना के बराबर है। जनपद पौड़ी गढ़वाल का कोटद्वार एकमात्र रेलवे स्टेशन है जहां से देश की राजधानी दिल्ली के लिए दो ट्रेन संचालित है। लेकिन अपने राज्य उत्तराखंड की राजधानी देहरादून व कुमायूं क्षेत्र के हल्द्वानी, रामनगर व लालकुआं के लिए सीधी ट्रेन नहीं है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लिए पहले कोटद्वार से एक कोच जाता था। वह कुछ नजीबाबाद में (3009 -3010 हावड़ा- देहरादून) दून एक्सप्रेस में जुड़ता था। रेलवे ने लगभग आठ वर्ष पूर्व वह कोच भी बंद कर दिया है। देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, हल्द्वानी, रामनगर, लालकुआं के लिए पौड़ी गढ़वाल की जनता को नजीबाबाद व हरिद्वार से अपनी यात्रा करनी होती है। कोटद्वार से आंनद विहार के बीच चलने वाली रेलगाड़ी नजीबाबाद में लंबे समय तक खड़ी रहती है। रेलवे चाहे तो इस रेलगाड़ी को देहरादून या रामनगर तक चलाने पर विचार कर सकती है।
कोटद्वार से बिजनौर होकर मेरठ तक चले रैपिड ट्रेन
रेल मंत्रालय के पास एक अन्य सुझाव भी भेजा गया है। जिसमें दिल्ली से मेरठ तक चलने वाली रैपिड ट्रेन को मेरठ से गजरौला -बिजनौर होकर कोटद्वार तक चलाया जा सकता है। जिसे बाद में बिजनौर – हस्तिनापुर रेल मार्ग बनने पर कोटद्वार -नजीबाबाद -बिजनौर -हस्तिनापुर -मेरठ तक चलाया जा सकता है। इसके लिए बस पौड़ी गढ़वाल के सांसद अनिल बलूनी, नगीना सांसद चन्द्रशेखर आजाद व बिजनौर सांसद चंदन चौहान व मुरादाबाद सांसद रूचि वीरा को रेल मंत्री से भेंट कर यह मांग जनहित में उठानी चाहिए।
