जनहित के कार्यों से दे रहे गांव को नई दिशा
(चंद्रपाल सिंह चन्द / जगमोहन डांगी)
कोटद्वार। कहते हैं कि अगर सोच और संकल्प मजबूत हो तो बदलाव के लिए सरकारी तंत्र का इंतजार जरूरी नहीं होता। ऐसा ही उदाहरण पेश किया है जनपद पौड़ी की पट्टी मनियारस्यूं के ग्राम बुटली निवासी प्रवासी चंद्र प्रकाश कुकरेती ने जिन्होंने अपने संसाधनों से गांव के विकास की नई तस्वीर गढ़ी है।
चंद्र प्रकाश कुकरेती न केवल एक सफल प्रवासी हैं, बल्कि अपने गांव और समाज के प्रति उनकी संवेदनशीलता उन्हें खास बनाती है। चंद्र प्रकाश कुकरेती इससे पहले भी अपने गांव में समाजसेवी के जुड़े अनेक कार्य कर चुके हैं। उन्होंने मां बाल कुंवारी देवी और इष्टदेव नागराजा मंदिर का पुनः जीर्णोद्धार कर उन्हें भव्य और आकर्षक स्वरूप दिया था। इसके लिए बकायदा उड़ीसा प्रांत से विशेष कारीगरों को बुलवाया गया था। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने निजी संसाधनों से मुख्य सड़क से मंदिर तक लगभग पचास पचास मीटर के संपर्क सीसी खड़ंजा मार्ग का निर्माण भी करवाया।
कुकरेती द्वारा किए गए यह कार्य कहीं न कहीं सरकारी तंत्र को भी आईना दिखा रहे है। कहते हैं कि इच्छा शक्ति हो तो विकास संभव है। उन्होंने अपने पुराने पुश्तैनी मकान का भी पुनर्निर्माण कर उसे भव्य दो मंजिला भवन में तब्दील किया। यदि यही भवन नोएडा आदि महानगरों में बनाते तो लाखों रुपये का किराया मिल सकता था। लेकिन उन्होंने अपने गांव को प्राथमिकता देते हुए अपने माता पिता के सपनो को साकार किया।
चंद्रप्रकाश कुकरेती बताते कि उनके पिताजी गांव के विकास और गांव के कमजोर लोगों की मदद के लिए हमेशा आगे रहते थे। हम भी उनकी पद चिन्हों पर चलने का प्रयास कर रहे है। आज चंद्र प्रकाश कुकरेती जैसे प्रवासी लोगों की सोच और पहल यह संदेश देती है कि यदि हर गांव में ऐसे लोग आगे आएं, तो विकास की रफ्तार कई गुना बढ़ सकती है।
उनकी धर्मपत्नी स्व. नीलम कुकरेती की प्रथम पुण्यतिथि पर नोएडा (गौतम बुद्धनगर) स्थित उनके निवास पर पितृभोज का आयोजन किया गया। जिसमें स्कूली छात्र-छात्राओं को भी आमंत्रित कर सामाजिक सरोकार का परिचय दिया गया। आगामी 14 अप्रैल को उनकी धर्मपत्नी स्व. नीलम कुकरेती की प्रथम पुण्यतिथि है। उनकी स्मृति में वृक्षारोपण के अलावा बुर्जुग एवं दिव्यांग लोगों के लिए विशेष हेल्थ केयर काउंसलिंग के साथ उपकरण वितरण तथा भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन में मुख्य अतिथि जिला पंचायत सदस्य गढ़कोट सविता देवी मौजूद रहेंगी। चंद्र प्रकाश कुकरेती की यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के प्रति उनकी संवेदनशीलता को भी दर्शाती है।
