विभाजन स्मृति दिवस का उद्देश्य नफरत फैलाना नहीं, बल्कि बलिदानों को याद करना है: प्राचार्य
कोटद्वार। राजकीय महाविद्यालय कण्वघाटी में विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर एक संगोष्ठी एवं प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य वर्ष 1947 के भारत -पाक विभाजन के दौरान हुए कष्टों, विस्थापन और बलिदानों को याद कर नई पीढ़ी को देश की एकता और अखंडता के प्रति जागरूक करना था।

शुक्रवार को महाविद्यालय परिसर में समाजशास्त्र, राजनीतिक विज्ञान, हिंदी, संस्कृत तथा अर्थशास्त्र विभाग द्वारा “विभाजन की त्रासदी और भारत का पुनर्निर्माण” विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। इस दौरान प्राध्यापकों द्वारा विद्यार्थियों को विभाजन के कारणों, उसके प्रभाव और उसके बाद देश के पुनर्निर्माण के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी। महाविद्यालय में विभाजन से संबंधित दुर्लभ तस्वीरों, समाचार पत्रों की कतरनों और विस्थापितों की कहानियों की प्रदर्शनी लगाई गई थी। कार्यक्रम में अनेक विद्यार्थियों ने विभाजन पर कविता पाठ एवं अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हमें विभाजन की पीड़ा को याद रखकर देश की एकता को मजबूत करना है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्राचार्य प्रो. हरीश चंद्र ने कहा कि विभाजन विभीषिका हमारे इतिहास का एक दुखद अध्याय है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य नफरत फैलाना नहीं, बल्कि उन लोगों के संघर्ष और बलिदान को याद करना है जिन्होंने देश के लिए सब कुछ सहा। हमें ऐसे भारत का निर्माण करना है जो एकता और भाईचारे का प्रतीक हो। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस दौरान महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगण, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

