वन्य जीव व पोस्टर साइनेज प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने दिखाई रचनात्मकता
ऐपण के जरिए लोककला और प्राकृतिक विरासत को जोड़ा
कोटद्वार। भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत न्यास कोटद्वार चैप्टर की ओर से लैंसडाउन वन प्रभाग के सहयोग से वन्यजीव सप्ताह के तहत विभिन्न जागरूकता और रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ उनकी रचनात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान करना रहा। कार्यक्रम का नेतृत्व भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत न्यास कोटद्वार चैप्टर की कन्वीनर शांभवी पादुकोण राणा द्वारा व सहयोग गौरव वर्मा (आईएफएस) प्रभागीय वनाधिकारी लैंसडाउन वन प्रभाग ने दिया।
आयोजित कार्यक्रम के तहत कक्षा सात से बाहरवीं तक के विद्यार्थियों के लिए वन्यजीव पोस्टर एवं साइनेज प्रतियोगिता और वन्य जीव आधारित ऐपण कार्यशाला आयोजित की गई। पोस्टर एवं साइनेज प्रतियोगिता में विद्यार्थियों को पारंपरिक पोस्टर बनाने के बजाय साइन मेकर के रूप में सोचने के लिए प्रेरित किया गया। विद्यार्थियों द्वारा वन्य जीव संरक्षण, सह अस्तित्व, जैव विविधता, वन्य जीवों के आवास और जिम्मेदार व्यवहार जैसे विषयों पर संदेश परक डिजाइन तैयार किए गए। प्रतियोगिता में चयनित विजेता डिजाइनों को कोटद्वार में उपयुक्त स्थानों पर वास्तविक वन्य जीव साइनेज के रूप में विकसित किए जाने की संभावना है।
कार्यक्रम में आयोजित वन्य जीव प्रदर्शनी में हाथियों, उनके प्राकृतिक आवास और मानव -वन्य जीव संबंधों से जुड़ी जानकारियां प्रदर्शित की गई। इस प्रदर्शनी के माध्यम से विद्यार्थियों और आगंतुकों को वन्य जीव संरक्षण के महत्व को समझने का अवसर मिला।
वन्य जीव आधारित ऐपण कार्यशाला में पारंपरिक ऐपण कलाकार नीरू शाह द्वारा विद्यार्थियों को उत्तराखंड की लोककला के विभिन्न पैटर्न और तकनीकों की जानकारी दी गई। इस दौरान विद्यार्थियों ने गेरू व चावल के घोल से वन्य जीवों पर आधारित ऐपण चित्र बनाए। इस पहल के द्वारा उत्तराखंड की पारंपरिक लोक कला को प्राकृतिक विरासत और वन्य जीव संरक्षण से जोड़ने का प्रयास किया गया।
आयोजकों ने बताया कि गुरुवार 8 अक्तूबर को प्रतियोगिता के समापन पर ऐपण कार्यशाला और प्रतिभागियों का सम्मान कर विजेताओं की घोषणा की जाएगी। इस दौरान विद्यार्थी अपने तैयार किए गए डिजाइनों की प्रस्तुति भी देंगे। उन्होंने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत न्यास कोटद्वार चैप्टर और लैंसडाउन वन प्रभाग द्वारा आयोजित इन गतिविधियों के माध्यम से पर्यावरण जागरूकता, सांस्कृतिक विरासत और युवाओं की सार्थक भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है।
