स्थानीय व्यंजनों व पारंपरिक फसलों के संरक्षण का दिया संदेश
कोटद्वार। राजकीय महाविद्यालय कण्वघाटी में उत्तराखंड की पारंपरिक खाद्य संस्कृति, स्थानीय अनाज और पहाड़ी व्यंजनों के संरक्षण एवं पोषण संबंधी महत्व को लेकर गढ़भोज कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी पारंपरिक खाद्य संस्कृति से जुड़ने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।

महाविद्यालय परिसर में आयोजित गढ़भोज कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने प्रतिभाग कर अरबी के गुटके, मंडुवे की रोटी, तिल की चटनी, मीठा भात, गुलगुले, भांग की चटनी, लोबिया के पराठे, उड़द दाल के पकौड़े, पाथ्यूड, रोटना, आलू के गुटके, पहाड़ी रायता और पहाड़ी नमक सहित विभिन्न पारंपरिक व्यंजन तैयार किए। इस दौरान विद्यार्थियों द्वारा व्यंजनों की विधि, पारंपरिक उपयोग, स्थानीय महत्व और स्वास्थ्य लाभों की जानकारी भी साझा की गई।

महाविद्यालय के प्राचार्य हरीश चन्द्र ने अपने संबोधन में कहा कि पारंपरिक पहाड़ी व्यंजन उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। स्थानीय खाद्य पदार्थों और पारंपरिक फसलों को बढ़ावा देने से स्वस्थ जीवनशैली के साथ स्थानीय कृषि और अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इस मौके पर वक्ताओं द्वारा भी स्थानीय खाद्य परंपराओं एवं फसलों के संरक्षण की आवश्यकता पर विचार रखे गए।
