पर्वतीय जल स्रोतों के पुनर्जीवन और संरक्षण के लिए विकसित किया एच-स्पायर माडल
कोटद्वार/दुगड्डा। पौड़ी जनपद के विकास खंड दुगड्डा स्थित ग्राम जौरासी निवासी युवा शोधार्थी आयुष कुकरेती को उनके उत्कृष्ट वैज्ञानिक शोध के लिए उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन -2026 के समापन सत्र में प्रतिष्ठित ‘यंग साइंटिस्ट अवार्ड’ (युवा वैज्ञानिक पुरस्कार) से सम्मानित किया गया है। सम्मेलन के समापन समारोह में देश प्रदेश से जुटे वरिष्ठ वैज्ञानिकों एवं गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में उन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया गया।
वैज्ञानिक आयुष ने प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय सरकारी विद्यालय से जबकि हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर से स्नातक एवं परास्नातक की उपाधि प्राप्त की। एक ग्रामीण पृष्ठभूमि और सरकारी स्कूल से निकलकर राज्य स्तर के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक मंच पर यह उपलब्धि हासिल करने पर क्षेत्र में खुशी की लहर है।
आयुष को यह सम्मान उनके अभिनव शोध कार्य ‘एच-स्पायर’ हिमालयी झरना प्राथमिकीकरण एवं एकीकृत पुनरुद्धार मूल्यांकन के लिए दिया गया है। उनका यह शोध पर्वतीय क्षेत्रों में जल संसाधनों, स्प्रिंगशेड प्रबंधन तथा दीर्घकालिक जल सुरक्षा को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है। शोध के तहत पर्वतीय क्षेत्रों के सूखते प्राकृतिक जल स्रोतों (धारे-मंगरे) के वैज्ञानिक पुनर्जीवन के लिए जीआईएस आधारित एक विशेष मॉडल तैयार किया गया है।
भविष्य में इस वैज्ञानिक माडल को एक सहज ‘यूज़र -फ्रेंडली’ मोबाइल ऐप्लिकेशन के रूप में विकसित करने की योजना है। इस तकनीक की मदद से कोई भी आम नागरिक या ग्रामीण अपने क्षेत्र के जल स्रोत के पुनर्भरण हेतु उपयुक्त उपचार विधियों तथा सटीक स्थलों की पहचान कर सकेगा। इससे सरकारी नीतियों एवं पुनर्जीवन योजनाओं को धरातल पर सटीक रूप से लागू करने में सहायता मिलेगी।
आयुष कुकरेती ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में गहराते जल संकट के समाधान के लिए पारंपरिक ज्ञान के साथ आधुनिक भू -स्थानिक तकनीकों का समन्वय समय की मांग है। उन्होंने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने शोध मार्गदर्शकों राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (एनआईएच), रुड़की के वैज्ञानिक ‘एफ’ डा. सोबन सिंह रावत, प्रो. डीएस मलिक एवं साथी इंजनियर सुमित सैनी को देते हुए उनके निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
